जिले के बारे मे

जिले के बारे में

सागर जिला मध्यप्रदेश के उत्तर मध्य क्षेत्र में बसा हुआ है |यह अंग्रेजो के शासन के समय SAUGOR के रूप में वर्तनी था | यह 23 deg 10’ और 24 deg 27’ उत्तरी अक्षांश और 78 deg 4’ और 79 deg 21’ पूर्वी देशांतर के बीच बसा हुआ है | यह जिला देश के एकदम केंद्र स्थान में स्थित है | जिले के दक्षिणी भाग से होकर कर्क रेखा गुजरती है|

नाम की उत्पत्ति हिन्दी शब्द सागर से हुई है जिसका अर्थ झील या समुद्र है | ऐसा इसलिए की एक बड़ी और सुन्दर झील के चारो और सागर जिले का निर्माण किया गया है | सागर १६६० में उड़ान सिह द्वारा स्थापित किया गया एवं १८६७ में नगर पालिका में गठन किया गया | यह एक प्रमुख सड़क एवं क्रषि व्यापार केंद्र है जहा तेल एवं आटा पिसाई , घी प्रसंस्करण, हथकरघा कपास बुनाई, बीड़ी निर्माण और रेलवे इंजीनियरिंग के उद्योग है | सागर भारत भर में अपने विश्वविद्यालय जिसका नाम डॉ हरिसिह गौर विश्वविद्यालय है और सेना की छावनी के कारण जाना जाता है | अभी अभी इसका नाम भाग्योदय अस्पताल के कारण भी प्रसिद्ध हुआ जिसका नाम करण जैनों के प्रसिद्ध संत श्री विद्यासागर महाराज के नाम पर रखा गया है | यहाँ पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज एवं फारेंसिक साइंस प्रयोगशाला भी है |

सागर एक व्यापक मैदानी इलाका है जिसमे निचले जंगली पहाड़ है और सोनार नदी से पानी की आपूर्ती होती है | गेहूँ,छोला, सोघुम , और तिलहन , इस क्षेत्र की प्रमुख फसलें हैं | व्यापक स्तर पर जानवर भी पाले जाते है | बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, लौह अयस्क और अभ्रक की व्यापक मात्र पाई जाती है | एरन के पास के पुरातात्विक स्थल से गुप्ता काल के कई शिलालेख का पता चलता है |जिला सागर मुख्य रूप से एक अनुसूचित जाति जन जातिवर्ग का जिला है | करीब ७५ % जिला इन जातियों से भरा है | जिले में आतिवासियो की भी एक जाती पाई जाती है जिसे राज्गौद के नाम से जाना जाता है |